भानगढ़ के किले का रहस्य


भानगढ़ के किले का रहस्य

भानगढ़ का किला एशिया की सबसे डरावनी जगहों में से एक है। भानगढ़ का किला राजस्थान के अलवर जिले में है। आम तौर पर लोग इसे भूतहा किला के नाम से जानते हैं। इस किले को 16वीं शताब्दी में बनाया गया था। रावली पर्वत की गोद में बसा यह किला महाराजा भगवंत दास जी ने बनवाया था, जो चारों तरफ पहाड़ियों पर हरियाली घिरा हुआ है। किले के अन्दर मंदिर भगवान सोमेश्वर, गोपीनाथ, केशव राय और मंगला देवी का मंदिर है। मंदिरों की दीवारों और खंभों पर बेहतरीन नक्काशी की गई है।

भानगढ़ किले का निर्माण के बाद 300 सालों का इतिहास में कई उतर-चढ़ाव आया। महाराजा भगवंत दास जी मृत्यु के बाद उनके बेटे माधो सिंह जी ने इस किले को अपना रिहाईश बना लिया। माधो सिंह जी के तीन पुत्र सुजान सिंह, छत्र सिंह और तेज सिंह थे। माधो सिंह जी के मृत्यु के बाद किले का अधिकार छत्र सिंह जी को मिला। छत्र सिंह जी का पुत्र अजब सिंह जी था। अजब सिंह जी ने इस किले का निर्माण फिर से कराया था। अजब सिंह जी के तीन पुत्र काबिल सिंह, जसवंत सिंह और हरि सिंह थे।

1722 में हरि सिंह जी भानगढ़ का शासक बनाये गये। हरि सिंह जी के पुत्र काबिल सिंह और जसवंत सिंह ने औरंगजेब से प्रभावित होकर धर्म परिवर्तन कर लिये। धर्म परिवर्तन के बाद उनका नाम मोहम्मद कुलीज़ और मोहम्मद दहलीज़ पड़ा। औरंगजेब ने इन दोनों को भानगढ़ का किले की ज़िम्मेदारी सौंपी थी। राजा सवाई जय सिंह ने इन दोनों को मारकर किले पर कब्ज़ा कर लिया था। आज वीरान और खंडहर में तब्दील है। आज खंडहर में तब्दील यह किला रहस्य और भूतहा किला के नाम से जाना जाता है।

आज इस खंडहर की देख-रेख भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा कि जाती है। स्थानीये लोगों का मानना है कि यहाँ रहस्यमयी घटनाएं होती है, यहाँ रहस्यमयी घटनाओं लोगों का मानना है कि यहाँ रोने और चिल्लाने आवाजें आती हैं, लोगों ने यहाँ साये भटकते देखें हैं। इन बातों में कितनी सच्चाई है यह तो हमें भी पता नहीं है। इसलिय किले को देखने के लिय पर्यटकों विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है। कानूनी रूप से इस किले में सूर्यास्त के बाद जाना और रुकना मना है।

भानगढ़ के किले का रहस्य

भानगढ़ का किला के भूतहा होने की पीछे दो कहानियाँ प्रचलित हैं।

दुसरी कहानी किले के भूतिया होने की है। इस कहानी के अनुसार भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावति बहुत ही सुंदर थी। उसके सुंदरता की चर्चा पूरे भानगढ़ में थी। भानगढ़ में सिंधु सेवड़ा नामक एक तांत्रिक रहा करता था। एक दिन राजकुमारी रत्नावति बालों के लिए तेल लेने बाज़ार गई थी। तब तांत्रिक ने काला जादू का प्रयोग कर उस तेल से राजकुमारी रत्नावति को अपने वश में करना चाहता था, लेकिन तांत्रिक के इस षड्यंत्र का पता रत्नावती को चल गया। राजकुमारी ने उस तेल को पत्थर पर फेंक दिया और उसी पत्थर से तांत्रिक को मारवा दिया। मरते-मरते तांत्रिक ने भानगढ़ और राजकुमारी रत्नावति को श्राप दे दिया, कि भानगढ़ निवासियों का मृत्यु हो जाय और उनकी आत्मा भानगढ़ रहेगी। एक ही महीने बाद भानगढ़ की पड़ोसी राज्य अजबगढ़ से युद्ध हो गई। युद्ध में रत्नावति और भानगढ़ निवासियों की मारे गए। तब से भानगढ़ वीरान हो गया और यह खंडहर बनता जा रहा है।


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